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केदारनाथ यात्रा 2019  -  सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड

इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

    स्टेटबैंक के एटीएम के बाहर रातभर जमीन पर सोने के बाद मेरी आँख सुबह जल्दी ही खुल गई, दरअसल मैं रात को ठीक से सो ही नहीं सका और सुबह होने की प्रतीक्षा करता रहा था, दिल में भोलेनाथ से मिलने की लालसा अब उनके द्वार पर आकर और भी तीव्र हो चली थी, अब बस ऐसा लग रहा था कि बस जल्दी से चढ़ाई शुरू कर दूँ और केदारनाथ बाबा के मंदिर पर जाकर माथा टेकूँ, बस ऐसा सोच ही रहा था कि सबसे पहले नहा धोकर तैयार आचार्य विष्णुजी ने बताया कि ऊपर चढ़ाई शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, तभी चढ़ाई शुरू होगी। रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए और अपनी आगे की यात्रा को अंतिम पड़ाव तक पहुँचाने केलिए हम सभी सोनप्रयाग स्थित रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुंचे। यह सोनप्रयाग में केदारनाथ मार्ग में स्थित है। यहाँ पहुंचकर देखा तो बहुत ही लम्बी लाइन लगी हुई थी, माँ को चाय की दुकान पर बैठाकर हम रजिस्ट्रेशन हेतु लाइन में लग गए, एक घंटे लाइन में लगे रहने के बाद हमें पता चला कि यह रजिस्ट्रेशन हम अपने मोबाइल में भी स्वतः ही कर सकते हैं, लाइन …

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केदारनाथ यात्रा 2019 - हरिद्वार से सोनप्रयाग बस यात्रा


शाम को गंगा स्नान करने  के बाद हम धर्मशाला पहुंचें और अपने अपने घरों से जो कुछ हम खाने को लाये थे उसे ही खाकर अपने बिस्तर लगाकर सो गए।  त्रिपाठी जी धर्मशाला की सबसे  ऊपर की छत पर जाकर सो गए जहाँ इस जून के महीने में भी हमें  ठंडी हवा रात को लगी रही थी। सुबह तड़के ही हम सब उठकर नहाधोकर बस स्टैंड की तरफ निकल गए। बस स्टैंड पहुंचकर देखा तो बद्रीनाथ जाने वाली उत्तराखंड की एकमात्र रोडवेज बस निकल चुकी थी, इसलिए बस स्टैंड के बाहर से ही चलने वाली एक प्राइवेट बस में हमने अपनी अपनी सीट बुक कर लीं। 
सुबह आठ बजे  के आसपास बस हरिद्वार से रवाना हो चली, यह बस अगस्तमुनि तक ही जा रही थी। अगस्तमुनि रुद्रप्रयाग से आगे केदारनाथ जाने वाले मार्ग में पड़ता है। ऋषिकेश निकलने के पश्चात् बस अब पहाड़ों की तरफ अपना रुख कर रही थी। यही वो पहाड़ थे जिनमें जाने का सपना मैं काफी समय से देख रहा था। गोलाकार घुमावदार सड़कों पर बस में बैठकर यात्रा करने का आनंद ही कुछ और होता है, गंगा नदी अब काफी नीचे गहरी घाटी में बहती हुई दिखाई दे रही थी। जितना यहाँ यात्रा करने में आनंद आत…