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RAJGIR STOOP

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विश्व शांति स्तूप - राजगीर
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पिछली यात्रा - बिम्बिसार की जेल और जीवक का दवाख़ाना 
      जीवक का दवाखाना देखने के बाद हमारी घोड़ागाड़ी राजगीर के गिद्धकूट पर्वत की तरफ बढ़ चली।  कहा जाता है कि यही वो पर्वत है जिस पर बैठकर महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिया था। उन्ही की याद में यहाँ एक विशाल स्तूप का निर्माण कराया गया है जो राजगीर स्तूप के नाम से जाना जाता है, इसे विश्व शांति स्तूप भी कहते हैं। यह पिकनिक के लिए बेहद खूबसूरत स्थान है यहाँ स्तूप तक जाने के लिए रोपवे की व्यवस्था है यह रोपवे एक सीट का है इसलिए यह अन्य रोपवे से थोड़ा अलग और एडवेंचर लगता है। स्तूप के चारों तरफ महात्मा बुद्ध की मूर्तियां स्वर्णिम रूप में व्यवस्थित हैं। 
      ऐसे स्तूप देश में अन्य जगहों पर भी हैं। कुछ देर मैं स्तूप के आसपास ही घूमता रहा कि तभी रोपवे कंपनी का अनाउंस हुआ कि लंच का समय हो गया है रोपवे आधा एक घंटे के लिए बंद रहेगा, इसलिए जिसे जाना हो वो अभी पहुँच सकते हैं। मैं ये सुनकर सीधे रोपवे तक पहुंचा और पहाड़ से नीचे की तरफ रवाना हो गया, रास्ते में अचनाक लाइ…

SAPTPARNI CAVE

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वैभारगिरि पर्वत और सप्तपर्णी गुफा 
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     ब्रह्मकुंड में स्नान करने के बाद मैं इसके पीछे बने पहाड़ पर चढ़ने लगा, यह राजगीर की पांच पहाड़ियों में से एक वैभारगिरि पर्वत है जिसे राजगीर पर्वत भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इसी पर्वत पर वह ऐतिहासिक गुफा स्थित है जहाँ अजातशत्रु के समय प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था। इसे सप्तपर्णी गुफा कहते हैं। माना जाता है प्रथम बौद्ध संगीति महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के अगले वर्ष मगध सम्राट अजातशत्रु द्वारा राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में आहूत की गई जिसमे 500 से भी अधिक बौद्ध भिक्षुओं ने भाग लिया था तथा जिसकी अध्यक्षता महाकश्यप द्वारा की गई।       इसी के साथ ही यहाँ जैन सम्प्रदाय के कुछ पूजनीय मंदिर भी स्थित हैं। और इनके अलावा एक महादेव का मंदिर भी इस पर्वत स्थित है। इसप्रकार यह पर्वत तीनों धर्मो के लिए विशेष महत्त्व रखता है।

BRAHMKUND

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ब्रह्मकुंड - गर्मपानी का कुंड

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       अजातशत्रु के किले से थोड़ा आगे चलने पर राजगीर पर्वत दिखाई देता है, यह पर्वत गिद्धकूट पर्वत के ठीक सामने है। राजगीर पर्वत को वैभारगिरि पर्वत भी कहते हैं। राजगीर में ऐसे पांच पर्वत हैं जो जैनियों के धार्मिक स्थल हैं। महावीर स्वामी और जैनधर्म के अन्य अनुयायिओं से जुड़े यह पर्वत आज भी जैन धर्म की व्याख्या करते नजर आते हैं। राजगीर पर्वत के नीचे ही गरमपानी के कुंड हैं। इन्हे ब्रह्मकुंड कहा जाता है। हिन्दू धर्म में इस कुंड का अत्यधिक महत्त्व है। अभ्रक, गंधक से युक्त ब्रह्मकुंड का पानी गर्म होता है और चर्मरोग में काफी लाभदायक होता है।

AJATSHATRU FORT

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अजातशत्रु का किला 
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राजगीर रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर मैं राजगीर शहर में आया, सुबह सुबह ही पैदल अजातशत्रु के किले तक पहुंच गया । यह किला, गया - मोकामा राजमार्ग 82 पर स्थित है। यह किला पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुका है अब केवल इसकी बाहरी दीवारों के अवशेष ही शेष हैं, किले के अंदर जहाँ किसी ज़माने में राज महल हुआ करते थे उस जगह अब केवल वर्तमान में मैदान ही बचे हैं किसी भी राजमहल के अवशेष अब यहाँ देखने को नहीं मिलते हैं। किले के रूप में इसकी चारदीवारी ही शेष बची है जो इसके किसी समय में विशालकाय होने का संकेत देती है। 

RAJGIR

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राजगीर या राजगृह - एक पर्यटन यात्रा 
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      मेरी ट्रेन सुबह ही राजगीर पहुँच गई थी, जनरल कोच की ऊपर वाली सीट पर मैं सोया हुआ था, एक बिहारिन आंटी ने मुझे नींद से उठाकर बताया कि ट्रेन अपने आखिरी स्टेशन पर खड़ी है। मैं ट्रेन से नीचे उतरा तो देखा एक बहुत ही शांत और खूबसूरत जगह थी ये, सुबह सुबह राजगीर की हवा मुझे एक अलग ही एहसास दिला रही थी कि मैं रात के चकाचौंध कर देने वाले गया और पटना जैसे शहरों से अब काफी दूर आ चुका था। हर तरफ हरियाली और बड़ी बड़ी पहाड़ियाँ जिनके बीच राजगीर स्थित है। यूँ तो राजगीर का इतिहास बहुत ही शानदार रहा है, पाटलिपुत्र ( पटना ) से पूर्व मगध साम्राज्य की राजधानी गिरिबज्र या राजगृह ही थी जिसका कालान्तर में नाम राजगीर हो गया।