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Thursday, June 20, 2013

KANGRA


नगरकोट धाम 2013 

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   बैजनाथ से आखिरी ट्रेन पकड़कर हम शाम तलक काँगड़ा मंदिर स्टेशन पहुंचे, यह नगरकोट धाम का स्टेशन है, यहाँ से नगरकोट मंदिर तीन चार किमी दूर है, स्टेशन से बाहर निकल कर एक नदी पड़ती है जिसपर अंग्रेजों के समय का रस्सी का पुल बना है जो हिलाने पर जोर से हिलता भी है , यहाँ से आगे टेम्पू खड़े मिलते है जो दस रुपये प्रति सवारी के हिसाब से मंदिर के दरवाजे तक छोड़ देते हैं, और यहाँ से बाजार युक्त गलियों में होकर मंदिर तक पहुंचते हैं, यह माँ बज्रेश्वरी देवी का मंदिर है, और एक प्रख्यात शक्तिपीठ धाम है, यह उत्तर प्रदेश की कुलदेवी हैं कहलाती हैं, भक्त यहाँ ऐसे खिचे चले आते हैं जैसे चुम्बक से लोहा खिंचा चला आता है। मंदिर में आने पर एक अलग ही अनुभव सा होता है ।

Wednesday, June 19, 2013

JOGINDER NAGAR




चामुंडा मार्ग से जोगिन्दर नगर की ओर 

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      आज सुबह मैं चार बजे ही उठ गया, नित्यक्रिया से न्रिवृत होकर मैंने सभी को जगाया और जल्दी से तैयार होने के लिए कहा, कारण था स्टेशन से जोगिन्दर नगर जाने वाली पैसेंजर को पकड़ना, जो सवा सात बजे चामुंडामार्ग स्टेशन आजाती है, इसके बाद जोगिन्दर नगर के लिए अगली ट्रेन शाम को पौने चार बजे थी जो हमारे किसी मतलब की नहीं थी। हम सभी जल्दी से तैयार होकर चामुंडामार्ग स्टेशन पहुंचे, अपने निर्धारित समय पर ट्रेन भी आ पहुंची, हमने इस बार भी अलग अलग डिब्बों में स्थान ग्रहण किया और चल दिए जोगिन्दर नगर की ओर ।

CHAMUNDA DHAM




चामुंडा देवी के मंदिर में 

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     ट्रेन से उतरकर सभी ने राहत की सांस ली, मानो ऐसा लगा जाने कितने दिनों बाद धरती पर पैर रखा है। कुमार की बुआ और बहिन तो अपनी चादर बिछाकर लेट गईं और वाकी सब भी ऐसे ही बैठ गए, चामुंडा मार्ग एक छोटा सा स्टेशन है, ट्रेन के जाने के कुछ ही समय बाद स्टेशन बिलकुल खाली हो गया, गर अब स्टेशन पर कोई मुसाफिर बचा तो वो हम ही लोग थे, स्टेशन के ठीक सामने पहाड़ है जिसके नीचे एक छोटी सी नदी बहती है। स्टेशन पर हमें काफी समय हो चुका था अब समय था माँ के दरबार में हाजिरी लगाने का , यह हमारी कांगड़ा यात्रा का पहला पड़ाव स्थल था जहाँ आज रात हमें ठहरना था ।