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Sunday, March 26, 2017

JAIPUR

आमेर किले की ओर 

     मुंबई से लौटे हुए अब काफी समय हो चुका था इसलिए अब मन नई यात्राओं की तैयारी कर रहा था बस जगह नहीं मिल रही थी, यूँ तो कुछ दिन बाद द्धारका यात्रा का प्लान तैयार था परन्तु उसमे अभी काफी समय था, मन बस अभी जाना चाहता था और ऐसी जगह जहाँ कुछ देखा न हो | काफी सोचने के बाद मुझे मेरे भाई गोपाल की याद आई जो इन दिनों जोधपुर में था, गर्मी के इस मौसम में रेगिस्तान की यात्रा ......... मजबूरी है।

शाम को घर जाकर जोधपुर हावड़ा एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवाया और यात्रा शुरू। शाम को मेवाड़ एक्सप्रेस पकड़कर भरतपुर पहुँच गया और ट्रैन का इंतज़ार करने लगा। 

Sunday, September 8, 2013

MUNABAO



बाड़मेर की तरफ़ 

इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

    आज मैंने पहली बार सूर्य नगरी में कदम रखा था। मैं जोधपुर स्टेशन पर आज पहली बार आया था, यहाँ अत्यधिक भीड़ थी। कारण था बाबा रामदेव का मेला, जो जोधपुर - जैसलमेर रेलमार्ग के रामदेवरा नामक स्टेशन के पास चल रहा था। मैंने इंटरनेट के जरिये यहाँ से जैसलमेर के लिए रिज़र्वेशन करवा लिया था किन्तु वेटिंग में, अब पता करना था कि टिकट कन्फर्म हुई या नहीं। मैंने पूछताछ केंद्र पर जाकर पुछा तो पता चला कि टिकिट रद्द हो गई थी, मेरा चार्ट में नाम नहीं था।

     मैं स्टेशन के बाहर आया और यहाँ के एक ढाबे पर खाना खाया। यहाँ मैंने देखा कि सड़क पर दोनों तरफ चारपाइयाँ ही चारपाइयाँ बिछी हुई हैं बाकायदा बिस्तर लगी हुई। किराया था एक रात का मात्र 40 रुपये। परन्तु इसबार मेरा सोने का कोई इरादा न था मुझे बाड़मेर पैसेंजर पकड़नी थी जो रात 11 बजे चलकर सुबह 5 बजे बाड़मेर पहुंचा देती है। इसप्रकार मैं बाड़मेर भी पहुँच जाऊँगा और रात भी कट जाएगी। मैंने ऐसा ही किया।

    बाड़मेर पैसेंजर से मैं सुबह पांच बजे ही बाड़मेर पहुँच गया, स्टेशन पर बने वेटिंग रूम में नित्यक्रिया से फुर्सत होकर बाहर गया और एक राजस्थानी बाबा की दुकान पर दस रुपये वाली बाड़मेरी चाय पीकर आया। सुबह साढ़े सात बजे मुनाबाब लिए यहाँ से पैसेंजर जाती है, मुनाबाब जाने के लिए ट्रेन  स्टेशन पर तैयार खड़ी थी, तभी मैंने देखा कि मुनाबाब की ओर जाने वाली दूसरी लाइन के सिग्नल हरे हो रहे हैं, मतलब पैसेंजर से पहले कोई और ट्रेन  मुनाबाब की और जाने वाली थी जिसका स्टॉप बाड़मेर स्टेशन पर नहीं था, और जब ट्रेन हमारे सामने से गुजरी तो पता चला कि यह थार एक्सप्रेस थी जो कि पाकिस्तान वाले यात्रियों को लेकर मुनाबाब जा रही है ।

   थार एक्सप्रेस जोधपुर के भगत की कोठी स्टेशन से चलकर भारत देश के आखिरी स्टेशन मुनाबाब तक जाती है और मुनाबाब पर पाकिस्तान की दूसरी थार एक्सप्रेस आती है जो भारतीय थार एक्सप्रेस के यात्रियों को कराची लेकर जाती है। यह ट्रेन पूरी तरह से कवर्ड रहती है ।

     मैं अपनी पैसेंजर ट्रेन से मुनाबाब तक घूम आया, यह भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन है इसके बाद रेलवे लाइन एल ओ सी पार करके पाकिस्तान में चली जाती है जहाँ हम नहीं जा सकते थे। यहाँ न कोई शहर था न कोई गांव, सिर्फ था तो केवल रेगिस्तान और भारतीय फ़ौज़ की चौकियां, यहाँ से पाकिस्तान महज एक किलोमीटर दूर था। मैं मुनाबाब देखकर वापस बाड़मेर आ गया और वहां से फिर जोधपुर। जोधपुर से शाम को मेरा हावड़ा एक्सप्रेस में रिजर्वेशन था दुसरे दिन मैं आगरा पहुँच गया।

जोधपुर  स्टेशन 

JODHPUR RAILWAY STATION

BADMER RAILWAY STATION

BADMER RAILWAY STATION

BADMER

BADMER

BHACHBHAR RAILWAY STATION

RAMSAR RLY. STATION

GAGRIYA RAILWAY STATION

GAGRIYA RAILWAY STATION

BADMER

BADMER

BADMER

BADMER

BADMER TO MUNAWAO

BADMER

BADMER

LEELMA RAILWAY STATION

BADMER

BADMER


MUNABAO RAILWAY STATION IND.

MUNABAO RAILWAY TIME TABLE

MUNABAO

MUNABAO

MUNABAO

MUNABAO RAILWAY STATION

MUNABAO

MUNABAO RLY STATION PAK

MUNABAO

MUNABAO RAILWAY STATION PAKISTAN

JAISINDER RAILWAY STATION

गडरा गांव विभाजन से पहले हिंदुस्तान की जमीन पर था, पर आज यह गांव पाकिस्तान में है और इस गांव का रेलवे स्टेशन आज भी भारत में ही है, रास्ता तो खो गया पर स्टेशन आज भी मौजूद है । और यही वो रेलवे स्टेशन जहाँ दुश्मनों ने रेलवे कर्मचारियों को मौत के  कर इस स्टेशन को आग लगा दी थी ।   

एक राजस्थानी महिला 

राजस्थान 

मुनाबाव - बाड़मेर पैसेंजर 

बाड़मेर  स्टेशन  

          

Saturday, January 1, 2011

GANGA SAGAR


गंगासागर की एक यात्रा 

    जनवरी की भरी सर्दियों में घर से बाहर कहीं यात्रा पर जाना एक साहस भरा काम है और यह साहस भरा काम भी हमने किया इसबार गंगासागर की यात्रा पर जाकर। भारत देश में अनेकों पर्यटन स्थल हैं और पर्यटन स्थल का एक अनुकूल मौसम भी होता है इसी प्रकार गंगासागर जाने का सबसे उचित मौसम जनवरी का महीना होता है क्योंकि मकरसक्रांति के दिन ही गंगासागर में स्नान का विशेष महत्व है। मकर सक्रांति आने से पहले ही यहाँ मेले की विशेष तैयारी होने लगती है। ये लोकप्रिय कहावत प्रचलित है :- सारे तीर्थ बार बार, गंगासागर एक बार।