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FATEHPUR SIKARI

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फतेहपुर सीकरी और सलीम चिश्ती की दरग़ाह
पिछली यात्रा - लोहागढ़ दुर्ग 

     पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान की सीमा पर स्थित आगरा शहर दुनियाभर में ताजमहल के कारण जाना जाता है परन्तु भारतीय इतिहास के अनुसार गौर किया जाये तो पता चलता है कि आगरा का अत्यधिक ऐतिहासिक महत्व मुग़ल सम्राट अक़बर की वजह से है जिन्होंने ना सिर्फ यहाँ एक मजबूत किले का निर्माण कराया बल्कि इसे अपनी राजधानी भी बनाया, साथ ही अपनी मृत्यु के बाद भी उन्होंने आगरा की ही धरती को पसंद किया और अपने मरने से पूर्व ही अपना मकबरा बनवा लिया। चूँकि आगरा शहर की स्थापना सिकंदर लोदी ने की थी परन्तु आगरा का मुख्य संस्थापक सम्राट अकबर को माना गया है।

BATESHWAR TEMPLE

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बटेश्वर धाम - आगरा 
यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 
       अब शाम करीब ही थी और मैं अभी भी आगरा से 72 किमी दूर बाह में ही था। नौगांवा किले से लौटने के बाद अब हम भदावर की प्राचीन राजधानी बाह में थे। मैंने सुना था कि यहाँ भी एक विशाल किला है परन्तु कहाँ है यह पता नहीं था। बस स्टैंड के पास पहुंचकर राजकुमार भाई को भूख लग आई पर उनका एक उसूल था कि वो जब तक मुझे कुछ नहीं खिलाएंगे खुद भी नहीं खाएंगे इसलिए मजबूरन मुझे भी कुछ न कुछ खाना ही पड़ता था। रक्षा बंधन का त्यौहार नजदीक था इसलिए मिठाइयों की दुकानें घेवरों से सजी हुई थीं। मैंने अपने लिए घेवर लिया और भाई ने वही पुरानी समोसा और कचौड़ी। दुकानदार से ही हमने किले के बारे में और बटेश्वर के लिए रास्ता पूछा। उसने हमें बाजार के अंदर से होकर जाती हुई एक सड़क की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये रास्ता सीधे बटेश्वर के लिए गया है इसी रास्ते पर आपको बाह का किला भी देखने को मिल जायेगा। 

PINAHAT FORT

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चम्बल किनारे स्थित -  पिनाहट किला
    आज मेरा जन्मदिन था और आज सुबह से बारिश भी खूब अच्छी हो रही थी इसलिए आज मैं कहीं घूमने जाना चाहता था इसलिए मैंने भिंड में स्थित अटेर दुर्ग को देखने का प्लान बनाया। परन्तु मैं वहाँ अकेला नहीं जाना चाहता था इसलिए मैंने अपने साथ किसी मित्र को ले जाने के बारे में सोचा। आगरा में मेरे एक मित्र भाई है जिनका नाम है राजकुमार चौहान, मैंने आज कई सालों बाद उन्हें फोन किया तो मेरा फोन आने पर उन्हें कितनी ख़ुशी हुई ये मैं बयां नहीं कर सकता। उनके पास मेरा नंबर नहीं था और आगरा से मथुरा आने के बाद मैंने उनके पास कभी फोन नहीं किया, आज अचानक मेरा फोन आने से वो बहुत खुश हुए। 

MARIAM TOMB

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मरियम -उज़ -जमानी का मक़बरा 
     सन 1527 में बाबर ने जब फतेहपुर सीकरी से कुछ दूर उटंगन नदी के किनारे स्थित खानवा के मैदान में अपने प्रतिद्वंदी राजपूत शासक राणा साँगा को हराया तब उसे यह एहसास हो गया था कि अगर हिंदुस्तान को फतह करना है और यहाँ अपनी हुकूमत स्थापित करनी है तो सबसे पहले हिंदुस्तान के राजपूताना राज्य को जीतना होगा, इसके लिए चाहे हमें ( मुगलों ) को कोई भी रणनीति अपनानी पड़े। बाबर एक शासक होने के साथ साथ एक उच्च कोटि का वक्ता तथा दूरदर्शी भी था। इस युद्ध के शुरुआत में राजपूतों द्वारा जब मुग़ल सेना के हौंसले पस्त होने लगे तब बाबर के ओजस्वी भाषण से सेना में उत्साह का संचार हुआ और मुग़ल सेना ने राणा साँगा की सेना को परास्त कर दिया और यहीं से बाबर के लिए भारत की विजय का द्धार खुल गया। इस युद्ध के बाद बाबर ने गाज़ी की उपाधि धारण की।  

AKBAR TOMB

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अकबर का मक़बरा 

       यूँ तो आगरा शहर की स्थापना 1504 ईसवी में सिकंदर लोदी ने की थी। आगरा से कुछ दूर दिल्ली मार्ग पर उसने सिकंदराबाद नामक शहर बसाया था जो कालांतर में सिकंदरा ने नाम से आज भी स्थित है। परन्तु यह सिकंदरा आज सिकंदर लोदी के कारण नहीं बल्कि मुग़ल सम्राट अकबर के मकबरे के कारण विश्व भर में विख्यात है। बेशक़ आगरा शहर की स्थापना सिकंदर लोदी ने की हो मगर आगरा को पहचान अकबर के शासनकाल में ही मिली जब उसने इसे अपनी राजधानी बनाया और आगरा किला का निर्माण कराया। अकबर ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही अपने मकबरे का भी निर्माण करा लिया था। उसकी एक पत्नी मरियम का मकबरा भी सिकंदरा के पास ही स्थित है। परन्तु मुझे खोज थी उसकी प्रिय पत्नी जोधाबाई की, अकबर के बाद वो कहाँ गई? क्या उसका भी कोई मकबरा स्थित है ? आगे जानिये। 

AGRA

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गुरु अर्जुनदेव का शहीदी स्थल - गुरु का ताल
   आज न जाने क्यों अपना ही शहर घूमने का ख्याल दिल में आया, सोचा दूर दूर से लोग जिस शहर को देखने आते हैं उसी शहर को छोड़ हम दूसरी जगहों पर जाते हैं और पाते हैं कि एक बार आगरा आना इस इस देश के हर इंसान का सपना है, और हो भी क्यों ना जब स्वर्ग में जिस महल की बुनियाद रखी गई हो और मोहब्बत के नाम पर जिसे जमीं  पे उतारा गया हो और उसकी ताजगी के नाम पर उसे ताज महल पुकारा गया हो उसे कौन नहीं देखना चाहेगा ।       पर आज मैं आपको ताजमहल नहीं, आगरा की उन जगहों पर जाऊंगा जहाँ शायद ही लोग जाना पसंद करते हैं, उन जगहों में सबसे पहले मेरी यात्रा वाहेगुरु का नाम लेकर आगरा के प्रसिद्द गुरुद्वारा, गुरु का ताल से प्रारम्भ करूँगा।