Saturday, March 2, 2019

यात्रा का केंद्र बिंदु - अमरावती

  यात्रा का केंद्र बिंदु  - अमरावती 


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अकोला से मैं अमरावती एक्सप्रेस में बैठ गया और इमरजेंसी खिड़की वाली सीट पर अपना स्थान ग्रहण किया। रेलवे के क्रिस ऍप में जब शकुंतला रेलवे का कोई भी टाइम शो नहीं हुआ तो मुझे लगा कि शायद अचलपुर जाने वाली नेरोगेज की ट्रेन बंद गई होगी परन्तु मुझे अपने बनाये यात्रा रूट के हिसाब से ही चलना था। अगला स्टेशन मुर्तिजापुर ही है और जब ट्रेन यहाँ पहुँची तो मेरी नजरों ने उस नेरोगेज की ट्रेन को तलाश करना शुरू कर दिया। वो सामने ही खड़ी थी पर पता नहीं जाएगी भी कि नहीं, बस यही सोचकर मैं ट्रेन से नहीं उतरा और इसी ट्रैन से अमरावती तक जाने का फैसला कर लिया। 


सुबह साढ़े आठ बजे तक मैं अमरावती पहुँच गया। यही शहर मेरी यात्रा का केंद्र बिंदु भी था और जब मैं यहाँ आया था तब माँ ने पुछा था कि कहाँ जा रहा है तो मैंने उन्हें भी अमरावती ही बताया था, इसप्रकार मेरी यह महाराष्ट्र की रेलयात्रा अमरावती यात्रा के नाम से जानी गई। अमरावती एक टर्मिनल रेलवे स्टेशन है और बडनेरा एक लाइन अमरावती शहर तक आती है और यहीं की होकर रह जाती है। यहाँ से प्लेटफॉर्म 2 पर सूरत एक्सप्रेस चलने के लिए तैयार खड़ी थी मेरा एकबार को मन हुआ कि सूरत ही चलते हैं परन्तु मैं अपने यात्रा रूट से अलग नहीं जा सकता था बेशक अचलपुर वाली ट्रेन का संचालन बंद हो गया हो परन्तु मुझे अचलपुर ही जाना था। 

मैं अमरावती स्टेशन के रेलवे स्टेशन का बोर्ड का फोटो खींचने पीछे जा रहा था कि टिकट चेक कर रहे टीटी ने मुझसे भी टिकट माँगा, बड़े गर्व के साथ सीना तान के मैंने अपना यात्रा टिकट उसे दिखाया और उसने बाइज़्ज़त मेरा टिकट मुझे वापस किया परन्तु मैं ना सही तो क्या बाकी कुछ लोगों को उसने बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़ लिया था। अमरावती स्टेशन पर भी मेलघाट के जंगलों की शानदार चित्रकारी हो रखी थी जो इस रेलवे स्टेशन पर सुंदरता के साथ साथ यहाँ पर्यटन स्थलों की जानकारी साझा करा रही थी। मैं कल नहाया नहीं था इसलिए आज सबसे पहले मुझे यहाँ नहा धोकर अपने आप को फ्रेश करना था ताकि आजकी यात्रा ताजगी के शुरू की जाए। स्टेशन पर बने वेटिंग रूम के बाथरूम में नहाधोकर मैं स्टेशन के बाहर आया। 

मैंने अमरावती का नाम इतिहास में बहुत सुना हुआ था जहाँ तक मुझे याद है यह आंध्र सातवाहन वंश के राजाओं की राजधानी थी जब मैंने गूगल से बारे में जाना तो पता चला यह वो अमरावती नहीं है। वो अमरावती तो आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के पास है और आंध्र प्रदेश राज्य की नई राजधानी हेतु प्रस्तावित है। ये अमरावती महाराष्ट्र की अमरावती है जिसका भारतीय इतिहास में खास योगदान नहीं है इसलिए यहाँ कोई भी बड़ा ऐतिहासिक स्थल नहीं है। अमरावती शहर एक साफ़ सुथरा और सुनियोजित तरीके से बसा हुआ शहर है, यहाँ के लोगों का व्यवहार और बाहरी लोगों से बात करने के लहजा भी काफी मधुर है। मैंने यहाँ एक दुकानदार से बस स्टैंड के बारे पुछा तो उसने मुझे बहुत ही प्रेम से बस स्टैंड का रास्ता बताया और मैं पैदल ही बस स्टैंड पहुँच गया जो  रेलवे स्टेशन से 1 किमी दूर था। 

बस स्टैंड पर महाराष्ट्र के अन्य शहरों में जाने के लिए बसें तैयार खड़ी हुई थीं। मुझे अचलपुर जाने वाली बस तलाश थी, एक नाश्ते की दुकानपर नास्ता करने के बाद मैंने उस दुकानदार से अचलपुर जाने वाली बस बारे में पूछा तो उसने बताया कि आप परतवाड़ा जाने वाली बस में बैठ जाना वही बस अचलपुर के पास होकर जायेगी और जब मैं परतवाड़ा के लिए बस की तलाश कर रहा था तो मुझे सीधे अचलपुर जाने वाली ही बस मिल गई जो परतवाड़ा नहीं जाएगी सीधे अचलपुर पहुंचेगी। 90 रूपये की लेकर मैं बस मैं बैठ गया और बस भी अब अचलपुर के लिए रवाना हो चुकी थी। 

मुर्तिजापुर रेलवे स्टेशन, यहीं से अचलपुर जाने वाली नेरोगेज की ट्रेन मिलती है। 

अमरावती सुपरफास्ट एक्सप्रेस 

और मैं अमरावती पहुँच गया। 


अमरावती टर्मिनल रेलवे स्टेशन 

अमरावती में आपका स्वागत है। 

अमरावती बस स्थानक 

  • अगली यात्रा - अचलपुर किला

1 comment:

  1. सही कहा अमरावती अब आंध्र की राजधानी भी है....दोनो में अंतर एकदम नही समझ में आता है...बढ़िया घुमक्कड़ी

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