ACHALPUR RAILWAY STATION


अचलपुर रेलवे स्टेशन 





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      अचलपुर किले से निकलने के बाद ऑटो वाले भाई ने मुझे अचलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर छोड़ दिया। ऑटो वाले भाई से काफी देर बात करने के बाद एक अपनेपन जैसा नाता सा जुड़ गया था और इसका एहसास तब हुआ जब हम दोनों एक दूसरे दूर होने लगे थे। उसके जाने से पहले ही मैंने स्टेशन पर बने टिकटघर में बैठे बाबू से पूछ लिया था कि ट्रेन कितने बजे तक आयेगी। बाबू ने कहा अभी दस बजे हैं दो घण्टे बाद, मतलब बारह बजे तक। टिकटबाबू के इतना कहते ही मेरे दिल वो सुकून प्राप्त हुआ जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकता। अब मुझे पक्का यकीन हो गया था कि ट्रेन तो आएगी और आखिरकार मेरे यहाँ आने का मकसद पूर्ण हो गया था। ऑटो वाले भाई को विदा कर मैं स्टेशन पर आकर बैठ गया। 


     अचलपुर का रेलवे स्टेशन अचलपुर और परतपाड़ा दोनों के बीच एक सुनसान क्षेत्र में स्थित है, स्टेशन से बाहर थोड़ी दूरी पर अचलपुर से परतपाड़ा जाने वाली सड़क है जहाँ कुछ दुकानें बनी हुई थीं और यहीं अचलपुर स्टेशन में प्रवेश करने वाला प्रवेश द्वार भी बना हुआ है। ब्रिटिश काल में जब भारत में रेल चलाने की शुरुआत हुई समय रेल का संचालन  करने वाली प्राइवेट कंपनी ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे ने महाराष्ट्र के अधिकांश भागों में रेलमार्गों को विस्तारित किया। सन 1912 में कपास की ढुलाई के लिए यवतमाल से अचलपुर तक नैरोगेज ट्रैक का निर्माण किया जिसे शकुंतला रेलवे नाम से जाना जाने लगा जिसका मुख्य केंद्र नागपुर - भुसावल रेलखंड पर स्थित मुर्तिजापुर को बनाया गया। यवतमाल और अचलपुर की तरफ से नेरोगेज की ट्रेन कपास लेकर मुर्तिजापुर आती थी और यहाँ से उस कपास को बड़ी लाइन यानी की ब्रॉडगेज द्वारा  पहुँचाया जाता था और फिर वहाँ से पानी के जहाजों द्वारा इंग्लैण्ड भेज दिया जाता था। 

     उसी समय में अचलपुर को आखिरी स्टेशन बनाकर इसे टर्मिनल स्टेशन बनाया गया। देश की आजादी के बाद इस रेलमार्ग का उपयोग कपास ढुलाई के लिए बंद हो गया और यहाँ चलने वाली ट्रेन अब पैसेंजर ट्रैन का कार्य करने लगी थी जिसका यहाँ के स्थानीय निवासी भरपूर लाभ लेते रहे हैं।  वर्तमान में  मुर्तिजापुर से यवतमाल जाने वाली नेरोगेज लाइन को बड़ी लाइन में बदलने के लिए बंद दिया गया है जल्द ही अचलपुर वाली रेल लाइन को भी गेज परिवर्तन के लिए बंद कर दिया जायेगा और यहाँ स्थित यह हेरिटेज रेलवे लाइन और रेलवे  स्टेशन वर्तमान विकास का रूप ले लेंगे। 

      मैं जब अचलपुर रेलवे स्टेशन के फोटो खींच रहा था तो यहाँ रेलवे में कार्यरत एक कर्मचारी ने मुझे स्टेशन के फोटो खींचने के लिए मना किया। मैंने उसे अनदेखा और अनसुना कर दिया और उससे बचकर दो चार फोटो स्टेशन के खींच लिए। यहाँ टिकटघर में आरक्षण केंद्र भी मौजूद है जहाँ से लोग पूरे देश में कहीं का भी ट्रेन में रिजर्वेशन करा सकते है। ट्रैन आने तक मैं यहीं इस टिकट घर के सामने बैठा रहा और पास में लगे  बिजली के बोर्ड में चार्जर लगाकर मोबाइल चार्ज कर लिया। 

     कुछ ही समय बाद यहाँ तेज आवाज करती हुई तीन डिब्बों वाली नेरोगेज की ट्रेन भी आ पहुँची। ट्रेन का इंजन आगे से हटाकर वापस पीछे लगा दिया गया और यह मुर्तिजापुर के लिए जाने के लिए तैयार खड़ी हो गई। आज भी अधिकांश सवारियाँ इस ट्रेन में यात्रा करती हैं छोटे छोटे स्टेशनों की ओर। टोपी वाला रेलवे कर्मचारी ट्रेन आते ही सचेत हो गया और इंजन की संटिंग करवाकर प्लेटफार्म पर गंदगी फ़ैलाने वाले लोगों से अपनी मराठी भाषा में कुछ सुनाने लगा। मैं उससे आँख बचाकर ट्रेन का और स्टेशन का फोटो खेंच लेता था। ट्रेन के अंदर बैठे हुए एक सज्जन संतरा खाकर उसका छिल्का ट्रेन  खिड़की में से प्लेटफॉर्म पर गिरा रहे थे जब यह दृश्य उस टोपी वाले रेलवे कर्मचारी ने देखा तो वह तुरंत वहां आ पहुंचा और उन  ट्रेन से उतरकर प्लेटफार्म से छिलका उठवाकर फेंकने पर विवश कर दिया। 

    इस प्रकार कहा जा सकता है कि अचलपुर रेलवे स्टेशन एक साफ़ सुथरा रेलवे स्टेशन है और यहाँ कार्यरत रेलवे कर्मचारी काफी सजग हैं जो अपना कार्य पूर्ण निष्ठा से करते हैं। इनकी इसी कर्तव्यनिष्ठा के कारण बेशक घाटे में ही सही किन्तु इस रुट पर ट्रेन का संचालन जारी है।  



अचलपुर रेलवे स्टेशन 

अचलपुर रेलवे स्टेशन

अचलपुर रेलवे स्टेशन


अचलपुर रेलवे स्टेशन

अचलपुर में एक साइकिल 

अचलपुर रेलवे स्टेशन प्रवेश द्धार 

अचलपुर रेलवे स्टेशन किराया सूची 

अचलपुर रेलवे स्टेशन

अचलपुर रेलवे स्टेशन

अचलपुर रेलवे स्टेशन

सुधीर उपाध्याय अचलपुर रेलवे स्टेशन पर 

अचलपुर रेलवे स्टेशन और ट्रेन 

सुधीर उपाध्याय अचलपुर रेलवे स्टेशन पर 

अचलपुर रेलवे स्टेशन

अचलपुर रेलवे स्टेशन

अचलपुर रेलवे स्टेशन



इस यात्रा के अन्य भाग निम्न प्रकार हैं - 
धन्यवाद 

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