Thursday, February 28, 2019

INDIAN NERROW GUAGE TRACK


भारत में नैरो गेज रेलवे 


    इस नई साल में यह दूसरा अवसर था जब मुझे फिर से कोई यात्रा करनी थी किन्तु अबकी बार की यह यात्रा किसी एक स्थान की ना होकर केवल रेल यात्रा को ही समर्पित थी, भारतीय रेलवे के मानचित्र के अनुसार मैंने उन सभी स्थानों खोज की जहाँ आज भी नैरो गेज और मीटर गेज की रेलवे लाइन सुचारु थीं। जब मैंने इन रेलवे लाइन की खोज की तो पाया कि पहले के मुकाबले नैरोगेज बहुत ही सिमट कर रह गई है और उसकी जगह या तो बड़ी लाइन मतलब ब्रॉड गेज ले चुकी है या फिर वो फाइनल ही बंद हो चुकी है। मीटर गेज  की लाइन तो पूर्ण रूप से समाप्त  होने की कगार पर है जिसका कभी देश के अधिकांश इलाकों में जाल बिछा रहता था। मैं इस बार हेरिटेज लाइनों को छोड़कर उन सभी नैरो गेज पर यात्रा करना चाहता था जिनका संचालन अब अल्पकालीन है। 
जिनमें प्रमुख कुछ नैरोगेज रेलवे लाइन  निम्न लिखित हैं -



  • इतवारी जँ. से नागभीड़ जँ.           - महाराष्ट्र 
  • मुर्तिजापुर जँ. से अचलपुर           - महाराष्ट्र 
  • पाचोरा जँ. से जामनेर                  - महाराष्ट्र 
  • बिलीमोरा से वघई                       - गुजरात 
  • मियागाम करजन से मोटीकोरल - गुजरात 
  • मियागाम करजन से मालसर      - गुजरात 
  • प्रताप नगर से जम्बूसर जँ.          - गुजरात 
  • पेटलाद से नाडियाड जँ.               - गुजरात 
  • ग्वालियर जँ. से शिवपुर कलां      - मध्य प्रदेश 
  • धौलपुर जँ. से तांतपुर व सरमथुरा  - राजस्थान व उत्तर प्रदेश 
  • अभनपुर जँ. से राजिम व धमतरी   - छत्तीसगढ़ 
मेरे पास अब दो विकल्प थे एक महाराष्ट्र और दूसरा गुजरात, बाकी सभी रेलवे लाइन पर मैं यात्रा कर चुका था। इन रेलवे लाइनों पर यात्रा करने का मकसद सिर्फ इतना ही था कि मुझे इन रेल खण्डों और यहाँ बने रेलवे स्टेशनों को देखकर हमें हमारे देश की विरासत और इतिहास का एहसास होता है क्योंकि यह रेल खंड या तो ब्रिटिशकालीन समय में अंग्रेजों द्वारा बनाये गए और बिछाए गए थे या फिर इन राज्यों के महाराजाओं द्वारा  इनका निर्माण अपने निजी यात्रा सुखों के लिए हुआ था और आज ये आम भारतीय जनता की सबसे कम किराये वाली रेलवे लाइनों में से एक हैं और जल्द ही ये इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अंकित हो जाने वाले हैं। इसलिए जो स्थान और चीजें इतिहास बनने वाली हों उन्हें अपनी आँखों से देखने और उनका उपयोग करने का रोमांच और अनुभव अलग ही होता है।







मेरे दादाजी रेलवे की सेवा से सेवानिर्वृत होते हुए 

बिलकुल बीच में मेरे पिताजी नंदखास रेलवे स्टेशन पर 

* आगरा फोर्ट पर  गोकुल एक्सप्रेस 

मथुरा जंक्शन पर गोकुल एक्सप्रेस 

* आगरा फोर्ट पर गोकुल एक्सप्रेस का इंजन लगते हुए 


आगरा फोर्ट स्टेशन का एक  दृश्य 

आगरा फोर्ट 
* उपयुक्त फोटो विषय की उपयोगिता हेतु गूगल से लिए गए हैं। ( फोटो साभार - VIC LINES )
  

1 comment:

  1. सुधीर भाई क्या कहूं इस पोस्ट जे दिल ले लिया...जुनून घुमक्कड़ी को बहुत सुंदर बना देता है...बिना किसी इंटेंशन के कुछ मजा नही....आपकी यह पोस्ट सीधी दिल मे उतर गई भाई...

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