Sunday, April 29, 2018

CHINTPURNI 2018


माँ चिन्तपूर्णी जन्मोत्सव

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        आज शनिवार है और २९ अप्रैल भी। हम माता चिंतपूर्णी के दर्शन हेतु एक लम्बी लाइन में लगे हुए थे। हमारी लाइन के अलावा यहाँ एक और भी लाइन लगी हुई थी। इस लाइन के व्यक्ति भी माता के दर्शन हेतु ही प्रतीक्षारत थे।  कई घंटे लाइन में लगे रहने के बाद हम मंदिर के बाहर बने बाजार तक पहुंचे।  यहाँ हमें दर्शन हेतु एक पर्ची दी गई।  इस पर्ची का पर्याय यही था कि आप बिना लाइन के माता रानी के दर्शन नहीं कर सकते। पर्ची लेने के बाद भी लेने ज्यों की त्यों ही थी। जब काफी समय हो गया और मुझे गर्मी सी मह्सूस होने लगी तो मैं पास की दुकान में पंखे की हवा खाने चला गया। दुकान में बैठना था इसलिए एक कोक भी पीली। तबतक मेरे अन्य सहयात्री लाइन में काफी आगे तक आ चुके थे। 


            हम मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचे तो देखा यहाँ गुब्बारे लगे हुए थे , काफी सजावट भी हो रखी थी। मैंने इस सजावट का कारण एक दुकानदार से पुछा तो उन्होंने बताया आज माता चिंतपूर्णी का जन्मदिवस है इसलिए ही आज इतनी सजावट है और भीड़ भी है। अब लाइन में लगने का दुःख कम हो गया था और मन में एक ख़ुशी सी महसूस हो रही थी कि मैं कितना भाग्यशाली हूँ कि आज के दिन माता के दरबार में आया हूँ जब उनका जन्मदिवस है। दुनिया में बहुत से जन्मदिवस समारोह मैंने देखे हैं। मथुरा का हूँ कृष्ण जी का जन्मदिवस तो हर साल ही देखता हूँ परन्तु पहली बार ऐसा मौका मुझे मिला कि माता चिंतपूर्णी के जन्मदिवस में मुझे सिम्मलित होने का मौका मिला।

         शाम के छः बजे मातारानी के शानदार दर्शन हुए और मन की बात बोलकर मैं यहाँ से वापस अपने घर की तरफ रवाना हो लिया। मेरी माँ के पैरों में सूजन बहुत ज्यादा थी और इस लाइन में लगे रहना उनके स्वास्थ के लिए उचित नहीं था इसलिए मैं उन्हें सभी के सामान के पास बस स्टैंड पर बैठा आया था। हम सभी बस स्टैंड पहुंचे।  हमारा आजका रिजर्वेशन अब अंदौरा स्टेशन से दिल्ली तक हिमाचल एक्सप्रेस में था। मैं इस ट्रैन को निकालना नहीं चाहता था। साम के सात बज चुके थे, यहाँ कोई भी बस अम्ब जाने के लिए नहीं खड़ी थी इसलिए मैंने एक टैक्सी बुक की और अब के लिए रवाना हो गया। कुमार और उसके साथी यहीं रह गए उन्हें बस से दिल्ली जाना था। हम अम्ब स्टेशन पहुंचे। हिमाचल एक्सप्रेस हमारे आँखों के सामने दिल्ली के लिए निकल चुकी थी हमें ले जाये बगैर।

चिंतपूर्णी की ओर 

दर्शन की लाइन में लगे मैं और कुमार 

ये प्यास है बड़ी - कोकाकोला 

चिंतपूर्णी जन्मदिवस 



अगली यात्रा - अम्ब अंदौरा स्टेशन पर एक रात

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