Friday, August 11, 2017

KERALA EXPRESS 17




केरला एक्सप्रेस  - मथुरा से तिरुपति


         केरला एक्सप्रेस जैसी ट्रेन में कन्फर्म सीट पाने के लिए रिजर्वेशन कई महीने पहले ही कराना होता है और ऐसा ही मैंने भी किया। इसबार मानसून की यात्रा का विचार साउथ की तरफ जाने का था, मतलब तिरुपति बालाजी। चेन्नई के पास ही हैं लगभग थोड़ा बहुत ही फर्क है, उत्तर से दक्षिण जाने में जो समय चेन्नई के लिए लगता है वही समय तिरुपति जाने के लिए भी लगता है। इसके लिए जरुरी है कि अगर आप ट्रेन से जा रहे है तो आपकी टिकट कन्फर्म हो। मैंने अप्रैल में ही रिजर्वेशन करवा लिया था और मुझे तीनो सीट कन्फर्म मिली। अब इंतज़ार यात्रा की तारीख आने का था और जब यह तारीख आई तो एक सीट मैंने कैंसिल करदी। अब मैं और माँ ही इस सफर के मुसाफिर थे।



       दोपहर डेढ़ बजे केरला एक्सप्रेस अपने सही समय पर मथुरा स्टेशन आई और हम तिरुपति की तरफ रवाना हो गए। मेरी सीट पर केरला का एक व्यक्ति बैठा था जो न मेरी भाषा समझ पा रहा था और नहीं मैं उसकी। पर उसकी एक मुस्कान मेरे गुस्से को प्रसन्नता में बदल देती थी इसलिए मैंने उसे बैठे ही रहने दिया। दरअसल उसकी सीट कन्फर्म नहीं हुई थी और वो वेटिंग टिकट पर ही यात्रा कर रहा था। उसे हमसे भी आगे तक जाना था। हालांकि मैं मलयालम नहीं समझता था फिर भी उसके साथ मेरा यह सफर काफी अच्छा गुजरा।

        आगरा, ग्वालियर ,झाँसी, बीना के बाद ट्रेन का अगला स्टॉप भोपाल था। भोपाल आने तक रात के दस बज चुके थे। घर से लाई गई पूड़ियाँ और सब्जी खाकर मैं और माँ सो गए और सुबह जब जगे तो ट्रेन चंद्रपुर स्टेशन पर खड़ी हुई थी, मैंने गूगल मैप में अपनी लोकेशन देखी तो पता चला अभी हम महाराष्ट्र में ही थे। रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर भी स्टेशन का नाम मराठी भाषा में लिखा हुआ था जिसका मतलब था कि अभी ट्रेन महाराष्ट्र में ही थी हमारे रेलवे स्टेशन जिस राज्य में होते हैं उनके नाम वहीँ की मुख्य भाषा में लिखे होते हैं, इससे पता चल जाता है कि हम अभी किस राज्य में हैं। चंद्रपुर के बाद महाराष्ट्र का आखिरी स्टेशन बल्लारशाह है इसके बाद ट्रेन तेलंगाना राज्य में प्रवेश करती है और उसके बाद आंध्रा में। तेलंगाना नया राज्य है पहले यह आंध्र प्रदेश ही था। तिरुपति तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की सीमा के पास आंध्र प्रदेश में ही पड़ता है।

        सुबह से शाम तक हमारी ट्रेन तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में ही चलती रही, और रात को साढ़े नौ बजे तिरुपति स्टेशन पहुंची। स्टेशन काफी साफ़ सुथरा था पर यहाँ भीड़ अत्यधिक थी। यहाँ अधिकतर यात्री अपने केश मुंडन कराये हुए थे जिनमे महिलाएँ भी मुख्य थी। तिरुपति में केश मुंडन का अत्यधिक महत्त्व है इसलिए लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद यहाँ आकर अपने केश मुंडन करवाते हैं। हम स्टेशन के वेटिंग रूम में पहुंचे और सबसे पहले नहा धोकर तैयार हुए। अब रात काफी हो चुकी थी, हम भी काफी लम्बा सफर तय करके आये थे इसलिए यहीं वेटिंग रूम में ही सोना उचित समझा क्योंकि हमें बाहर किसी भी होटल में रुकने के लिए रूम नहीं मिला। तिरुपति ट्रस्ट की तरफ से भी यहाँ रुकने के लिए श्रीनिवासम और विष्णु निवासम के नाम से दो बड़े होटल जैसे स्थान बने हैं पर इनमे रुकने के लिए बुकिंग पहले ही करानी होती है। 


केरला एक्सप्रेस में से एक नज़ारा 





चंद्रपुर रेलवे स्टेशन 

बल्लारशाह - एक रेलवे स्टेशन 

वर्धा नदी 


कागजों का शहर - सिरपुर 

सिरपुर कागजनगर 


रामगुंडम 

मैं और केरला एक्सप्रेस 

वरंगल रेलवे स्टेशन - तेलंगाना 




विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन 



कावली रेलवे स्टेशन 

तिरुपति -  यात्रा का आखिरी स्टेशन 



तिरुपति वेटिंग रूम 



अगले भाग


1 comment:

  1. This is the Facebook account of anti-hindu wisdom salafi activist who propogate hate about Hinduism.. complaint him in FB and spread the message to our Hindu brothers to take action against wisdom salafi extremists in Kerala.

    https://www.facebook.com/shafeeque.parappan

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